शोधकर्ताओं ने पाया कि लोगों को सिर्फ यह बताना कि तेज गाड़ी चलाना खतरनाक है, पर्याप्त नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि दोस्तों और समाज के दबाव को कम किया जाए, उस गलत सोच को बदला जाए जिसमें स्पीडिंग को मर्दानगी से जोड़ा जाता है, और सड़कें इस तरह बनाई जाएं कि गाड़ियां अपने-आप धीमी हो जाएं.
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